आज कुछ नया करने की उम्मीद में ये ब्लॉग लिखने की कोशिश का रहा हूँ .. इस ब्लॉग में बहुत कुछ मैंने नहीं लिखा है.. बस एक गुलदस्ता बनाने की कोशिश की है... मै इस में कितना कामयाब हुआ हूँ ये तो आप लोगो को ही बताना है....
Saturday, June 8, 2013
Tuesday, May 28, 2013
Friday, May 24, 2013
तुम बिन
आज कुछ कमी सी है ..... तुम बिन !!!
ना रंग, ना रौशनी ही है ..... तुम बिन !!!
वक्त अपनी रफ़्तार से चल रहा है .....
बस, एक धड़कन सिर्फ थमी सी है ..... तुम बिन !!!
ना बारिश है, ना धुआं ही .....
फिर भी दिल में तपीश सी है ..... तुम बिन !!!
बहुत रोका है मैंने बदल को, बरसने से .....
फिर भी, आँखों में नमी सी है ..... तुम बिन !!!
Thursday, May 9, 2013
कितना खूबसूरत है प्यार ....
कौन-सा जादू है इस नन्हे शब्द 'प्यार' में कि सुनते ही रोम-रोम में शहद का मीठा अहसास जाग उठता है। जिसे लव हुआ नहीं, उसकी इच्छा है कि हो जाए, जिसे हो चुका है वह अपने सारे 'एफर्ट्स' उसे बनाए रखने में लगा रहा है।
प्रेम, प्यार, इश्क, मोहब्बत, नेह, प्रीति, अनुराग, चाहत, आशिकी, लव। ओह! कितने-कितने नाम। और मतलब कितना स्वीट, सोबर और ब्यूटीफूल। आज प्रेम जैसा कोमल शब्द उस मखमली लगाव का अहसास क्यों नहीं कराता जो वह पहले कराता रहा है?
जो इन नाजुक भावनाओं की कच्ची राह से गुजर चुका है वही जानता है कि प्यार क्या है? कभी हरी दूब का कोमल स्पर्श, तो कभी चमकते चाँद की उजली चाँदनी।
सच्चा प्यार फीजिकल एट्रेक्शन नहीं है, बल्कि सुंदर सजीले रंगों की मनभावन बरखा है प्यार। अपने प्यार की एक झलक देख लेने की 'पिंक' बेचैनी है प्यार। 'उसके' पास होने अहसास को याद करने की 'ऑरेंज' इच्छा है प्यार। उसकी आवाज सुनने को तरसते कानों की 'रेड' गुदगुदी है प्यार।
उसकी स्माइल के पर दिल में गुलाल की लहर का उठना है प्यार। उसके पहले उपहार से शरबती आँखों की बढ़ जाने वाली चमकीली रौनक है प्यार। कितने रंग छुपे हैं प्यार के अहसास में?
सूखे हुए फूल की झरी हुई पँखुरी है प्यार। किसी किताब के कवर में छुपी चॉकलेट की पन्नी भी प्यार है और बेरंग घिसा हुआ लोहे का छल्ला भी।
प्यार कुछ भी हो सकता है। कभी भी हो सकता है। बस, जरूरत है गहरे-गहरे और बहुत गहरे अहसास की।
प्यार का अर्थ सिर्फ और सिर्फ देना है। और देने का भाव भी ऐसा कि सब कुछ देकर भी लगे कि अभी तो कुछ नहीं दिया।
प्यार किसी को पूरी तरह से पा लेने का स्वार्थ नहीं है, बल्कि डेटिंग पर अकेले में एक-दूजे को देखते रहने की भोली तमन्ना है प्यार। बाइक पर अपने साथी से लिपट जाना ही नहीं है प्यार, एक-दूसरे का रिस्पेक्ट और डिग्निटी है प्यार।
उधार लेकर प्रेशियस गिफ्ट खरीदना ही नहीं है प्यार, बल्कि अपनी सैलेरी से खरीदा भावों से भीगा एक रेड रोज भी है प्यार। प्यार को और क्या नाम दिए जाएँ, वह तो बस प्यार है, उसे पनपने के लिए हेल्दी स्पेस दीजिए।
प्यार की सीढ़ियाँ ...
हमने लैला-मजनूँ, रोमियो-जूलियट, सोहनी-महिवाल, हीर-रांझा के प्रेम के किस्से बहुत सुने...कुछ लोग उसे काल्पनिक भी कहते हैं। लेकिन आज मै जो प्रेम कथा आपके सामने लाया हूँ वह सत-प्रतिशत सत्य है। प्यार के बड़े-बड़े वादे तो हर कोई करता है... लेकिन जीवनभर साथ निभाने वाले लोग बहुत कम होते हैं।
यह कथा दो ऐसे प्रेमियों की है जिन्होंने देश-दुनिया से दूर रहकर भी उम्रभर एक दूसरे का साथ दिया। यह कथा चीन प्रांत की है। जहाँ पर एक बूढ़े शख्स और बूढ़ी औरत ने दुनिया की परवाह न करते सिर्फ एक-दूसरे के साथ रहकर अपने जीवन के पचास साल व्यतीत कर दिए।
वह दोनों चीन के दक्षिणी चौंगकिंग नगर की जियांगलिन कांउटी में बसी पहाड़ी पर स्थित एक गुफा में रहते थे। वह अपनी बूढ़ी पत्नी से बहुत प्यार करता था। चूँकि वह उससे दस साल बड़ी थी। इसलिए उसने अपना पूरा ध्यान अपनी प्यारी पत्नी की जरूरतों को पूरा करने में दिया।
आज से पचास साल पहले जब वो दोनों यहाँ पर आए थे तब उनके पास न तो कोई खाना था, न बिजली, न घर का कोई सामान। कुछ दिनों तक उन्होंने एक गुफा में रहकर घास और कंदमूल से ही अपना गुजारा किया। बाद में लुई नाम के इस 70 साल के बूढे प्रेमी ने अपनी पत्नी शू के लिए केरोसिन लेम्प बनाया और इस प्रकार उनके घर में रोशनी का आगमन हुआ।
दोस्तो, आप सोच रहेंगे कि इसमें ऎसी कौन सी बात है। जो इसे सबसे श्रेष्ठ प्रेम कथा कहा जा रहा है...तो सुनिए इसका जवाब...
आज से पचास साल पहले जब 19 साल के लुई गुओजियांग ने 29 साल की विधवा महिला शू चाओजिन को देखा तो पहली नजर में ही दोनों के बीच में प्यार हो गया।
उन्होंने अपनी शादी की बात अपने परिजनों के सामने रखी तो सभी ने उनका जमकर विरोध किया। शू भी लुई को बहुत चाहती थी। उन दोनों ने अपने परिवार के लोगों को मनाने का बहुत प्रयास किया लेकिन किसी को भी उन दोनों का रिश्ता मान्य नहीं था। आखिर में उन दोनों ने भागकर शादी कर ली और सबसे दूर दक्षिणी चौंगकिंग नगर की जियांगलिन कांउटी में बसी पहाड़ी पर स्थित एक गुफा में जाकर अकले रहने लगे।
शू उम्र में लुई से दस साल बड़ी थी। उसे पहाड़ से अपने घर तक की चढा़ई पार करने में मुश्किल हुई। लुई को यह बात मालूम थी इसलिए उसने यहाँ पर आने के दूसरे दिन से ही पहाड़ को काटकर सीढ़ियाँ बनाना शुरू कर दिया था। यह सिलसिला पचास सालों तक चला। इतने समय में उसने अपनी प्यार पत्नी की सहूलियत के लिए खुद अपने हाथों से लगभग 6 हजार सीढ़ियाँ बनाईं जो आज भी इस पहाड पर हैं।
वर्ष 2001 में इन सीढ़ियों पर साहसिक कार्य करने वाली एक संस्था का ध्यान पड़ा। पहले तो वह लोग यह मानने के लिए तैयार ही नहीं हुए कि इसको किसी एक आदमी ने अपने जीवन के पचास साल देकर खुद अपने हाथों से बनाया है, लेकिन बाद में उन लोगों को इस पर भरोसा हुआ।
एक दिन खेत से घर आने के बाद लुई अचानक ही बेहोश हो गया। यह उसके जीवन का अंतिम समय था। उसका हाथ अपनी पत्नी के हाथ में था। शू उसे देखकर रो रही थी। लुई ने एक प्यारभरी मुस्कान से शू के सामने देखा और फिर धीरे-धीरे उसकी आँखे हमेशा-हमेशा के लिए बंद हो गई।
तुमने मुझसे वादा किया था कि तुम जीवनभर मेरी देखभाल करोगे । तुम तब तक मेरा साथ नहीं छोड़ोगे जब तक मै इस दुनिया मे हूँ। और आज तुम मुझसे पहले ही यह दुनिया छोड़कर जा रहे हो । आखिर तुमने मेरे साथ धोखा किया है। लुई, मैं तुम्हारे बगैर कैसे जी सकूँगी।
उस बूढ़ी़ औरत की आँखों में आँसू थमने का नाम नही ले रहे थे। वह एक काले ताबूत में लिपटी हुई अपने पति की लाश के सामने फूट-फूटकर रो रही थी।
वर्ष 2006 में 'चाइनीज वूमन वीकली' ने उनके प्यार की इस दास्तान को चीन की सर्वश्रेष्ठ 10 प्रेम कहनियों में से एक के तौर पर प्रदर्शित की। यहाँ की स्थानीय सरकार ने आज भी उस 'प्यार की सीढ़ियों' को सुरक्षित रखा है और वह स्थान जहाँ पर यह दोनो प्रेमी रहते थे उसको म्यूजियम में तब्दील किया गया है। यहाँ पर हर दिन कई सारे प्रेमी आते हैं।
यह कथा दो ऐसे प्रेमियों की है जिन्होंने देश-दुनिया से दूर रहकर भी उम्रभर एक दूसरे का साथ दिया। यह कथा चीन प्रांत की है। जहाँ पर एक बूढ़े शख्स और बूढ़ी औरत ने दुनिया की परवाह न करते सिर्फ एक-दूसरे के साथ रहकर अपने जीवन के पचास साल व्यतीत कर दिए।
वह दोनों चीन के दक्षिणी चौंगकिंग नगर की जियांगलिन कांउटी में बसी पहाड़ी पर स्थित एक गुफा में रहते थे। वह अपनी बूढ़ी पत्नी से बहुत प्यार करता था। चूँकि वह उससे दस साल बड़ी थी। इसलिए उसने अपना पूरा ध्यान अपनी प्यारी पत्नी की जरूरतों को पूरा करने में दिया।
आज से पचास साल पहले जब वो दोनों यहाँ पर आए थे तब उनके पास न तो कोई खाना था, न बिजली, न घर का कोई सामान। कुछ दिनों तक उन्होंने एक गुफा में रहकर घास और कंदमूल से ही अपना गुजारा किया। बाद में लुई नाम के इस 70 साल के बूढे प्रेमी ने अपनी पत्नी शू के लिए केरोसिन लेम्प बनाया और इस प्रकार उनके घर में रोशनी का आगमन हुआ।
दोस्तो, आप सोच रहेंगे कि इसमें ऎसी कौन सी बात है। जो इसे सबसे श्रेष्ठ प्रेम कथा कहा जा रहा है...तो सुनिए इसका जवाब...
आज से पचास साल पहले जब 19 साल के लुई गुओजियांग ने 29 साल की विधवा महिला शू चाओजिन को देखा तो पहली नजर में ही दोनों के बीच में प्यार हो गया।
उन्होंने अपनी शादी की बात अपने परिजनों के सामने रखी तो सभी ने उनका जमकर विरोध किया। शू भी लुई को बहुत चाहती थी। उन दोनों ने अपने परिवार के लोगों को मनाने का बहुत प्रयास किया लेकिन किसी को भी उन दोनों का रिश्ता मान्य नहीं था। आखिर में उन दोनों ने भागकर शादी कर ली और सबसे दूर दक्षिणी चौंगकिंग नगर की जियांगलिन कांउटी में बसी पहाड़ी पर स्थित एक गुफा में जाकर अकले रहने लगे।
वर्ष 2001 में इन सीढ़ियों पर साहसिक कार्य करने वाली एक संस्था का ध्यान पड़ा। पहले तो वह लोग यह मानने के लिए तैयार ही नहीं हुए कि इसको किसी एक आदमी ने अपने जीवन के पचास साल देकर खुद अपने हाथों से बनाया है, लेकिन बाद में उन लोगों को इस पर भरोसा हुआ।
एक दिन खेत से घर आने के बाद लुई अचानक ही बेहोश हो गया। यह उसके जीवन का अंतिम समय था। उसका हाथ अपनी पत्नी के हाथ में था। शू उसे देखकर रो रही थी। लुई ने एक प्यारभरी मुस्कान से शू के सामने देखा और फिर धीरे-धीरे उसकी आँखे हमेशा-हमेशा के लिए बंद हो गई।
तुमने मुझसे वादा किया था कि तुम जीवनभर मेरी देखभाल करोगे । तुम तब तक मेरा साथ नहीं छोड़ोगे जब तक मै इस दुनिया मे हूँ। और आज तुम मुझसे पहले ही यह दुनिया छोड़कर जा रहे हो । आखिर तुमने मेरे साथ धोखा किया है। लुई, मैं तुम्हारे बगैर कैसे जी सकूँगी।
उस बूढ़ी़ औरत की आँखों में आँसू थमने का नाम नही ले रहे थे। वह एक काले ताबूत में लिपटी हुई अपने पति की लाश के सामने फूट-फूटकर रो रही थी।
वर्ष 2006 में 'चाइनीज वूमन वीकली' ने उनके प्यार की इस दास्तान को चीन की सर्वश्रेष्ठ 10 प्रेम कहनियों में से एक के तौर पर प्रदर्शित की। यहाँ की स्थानीय सरकार ने आज भी उस 'प्यार की सीढ़ियों' को सुरक्षित रखा है और वह स्थान जहाँ पर यह दोनो प्रेमी रहते थे उसको म्यूजियम में तब्दील किया गया है। यहाँ पर हर दिन कई सारे प्रेमी आते हैं।
दोस्ती हो या प्यार सबके लिए अलग है गुलाब.....
गुलाब के रंगों का अर्थ
लाल:
लाल रंग का गुलाब पति-पत्नी, प्रेमी-प्रेमिका व चाहने वालों के बीच अगाध प्रेम और जुनून को व्यक्त करता है। इस वेलेंटाइन वीक पर आप भी लाल गुलाबों का गुलदस्ता भेजकर अपने चाहने वालों को प्यार का अहसास करा सकते है।
पीला:
गुलाब का पीला रंग खुशी, विश्वास और दोस्ती का अहसास कराता है। पीले रंग का गुलाब देने का मतलब होता है कि दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदलती जा रही हैं। वेलेंटाइन वीक में खास दोस्तों को पीले गुलाब भेजे जा सकते हैं।
सफेद:
गुलाब का सफेद रंग शालीनता, गोपनीयता, मासूमियत और आकर्षण का प्रतीक है। जिन लोगों के साथ आपके संबंध ठीक-ठाक हैं उन्हें सफेद गुलाब भेजकर आप उनकी अहमियत का अहसास करा सकते है।
नारंगी:
गुलाब का नारंगी रंग का उत्साह, इच्छा और आकर्षण का संकेत देता है। इस वेलेंटाइन डे पर अगर आप किसी के साथ प्रेम संबंध में बंधना चाहते हैं तो नारंगी गुलाब देकर आप अपनी दिल की बात सामने वाले को बता सकते है।
गुलाबी:
गहरे गुलाबी रंग का फूल, नम्रता, दया, कृतज्ञता और धन्यवाद देने में मददगार साबित होता है। अगर किसी ने आपकी सच्चे दिल से मदद की है तो उसे शब्दों के साथ गुलाब देकर इस बात का अहसास कराएं।
प्यार के रिश्ते..
उसकी बात सुनकर जैसे पैरो से ज़मीन निकल गयी हो, अपने कानो पर यकीन नहीं आ रहा था,, वह कहती जा रही थी हाँ मैं जा रही हूँ, मैंने यह जगह छोडने का फैसला बहुत पहले कर लिया था लेकिन तुम्हें पहले इसलिए नहीं बताया की मुझ मे इतनी ताकत नहीं थी कि तुम्हारा उदास चेहरा देख सकूँ अगर तुम ज़िद करते तो शायद मैं रुकने के लिए मजबूर हो जाती , बस अब अगर तुम मुझे चाहते हो तो मुझे नहीं रोकना, मुझे हंसी खुशी विदा करना, ज़िंदगी कभी रुकती नहीं है और ना ही किसी के जाने से खत्म हो जाती है, मिलना बिछड्ना तो नसीब मे लिखा होता है यह कभी मत सोचना कि मैं तुम्हें भूला दूँगी, ना मैं तुम्हें भुला पाओंगी और ना तुम मुझे, लेकिन हमारा साथ बस यहीं तक है !!
उसने अपनी बात खत्म किया और बाहर चली गयी और मैं दुख और निराश बैठा सोच रहा था आखिर क्या ऐसी मजबूरी थी जो वह बिना बताए चली गयी क्यो इतने दिनो का प्यार एक पल मे जुदा हो गया,, जिसके बिना एक पल भी गुजरना मुश्किल था वह हमेशा के लिए चला गया, क्या पारिवारिक रिश्तो के आगे प्यार के रिश्तो कि कोई कीमत नहीं होती है क्या प्यार के रिश्ते की कीमत खून के रिश्ते के आगे कुछ नहीं होती ? मैंने उसके लिए सब कुछ किया लेकिन आज वह मुझे अकेला छोड़ कर चली गयी, क्या उसने एक बार भी नहीं सोंचा की मैं उसके बग़ैर कैसे रहूँगा !! मैं तो एक दोराहे पर आ गया हूँ,, एक कदम बढ़ाना भी मुश्किल पड़ रहा था समझ मे नहीं आता था की ज़िंदगी कैसे गुज़ारी जाये !! थक कर एक जगह बैठ गया !! दूर कहीं से आवाज़ आ रही थी !!
छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए यह मुनासिब नहीं आदमी के लिए
प्यार से भी ज़रूरी कई काम है प्यार सब कुछ नहीं ज़िंदगी के लिए .
Monday, May 16, 2011
दिल दोषी या दिमाग?
प्रेम में पड़ता है कौन? दिल या दिमाग? नए शोध के मुताबिक तो दोषी संभवतः दिमाग ही है. प्रेम होता है तो मस्तिष्क के 12 क्षेत्र एक साथ सक्रिय हो जाते हैं और डोपामाइन, ऑक्सिटोन, एड्रेनालाइन और वासोप्रेसिन जैसे रसायनों का स्त्राव करने लगते हैं.
प्रेम की अनुभूति मस्तिष्क के उन बौद्धिक क्षेत्रों को भी प्रभावित करती है जो मेटाफर, बाँडी इमेज और मेंटल रिप्रेजेंटेशन जैसी जटिल बोध क्रियाओं के लिए जिम्मेदार होते हैं. शोध में यह भी पता चला कि विभिन्न प्रकार का प्रेम अनुभव करने पर मस्तिष्क के कुछ हिस्से किस तरह सक्रिय हो जाते हैं. बीच मस्तिष्क में मौजूद दर्द और खुशी के केंद्र विभिन्न तरह के प्रेम के लिए विभिन्न गतिविधियों का प्रदर्शन करते हैं.
Sunday, May 1, 2011
प्रेम
प्रेम दुनिया का सबसे खुबसूरत एहसास है ...
जितनी परिभाषाये प्रेम की है उतनी दुनिया में किसी भी दूसरे मनोभाव की नहीं है....
ये वह एहसास है जिसे मानव ही नहीं पशु-पछी,पेड़-पौधे भी समझते है
प्रेम अभिव्यक्ति है --आनंद की,मधुरता की,सौंदर्य की,,
प्रेम वियोग है,त्याग है,समर्पण है .....
प्रेम कभी आंसुओ में छिपी मुस्कान जैसा है तो कभी मुस्कान में छिपे आंसुओ जैसा है..
प्रेम,
बहुआयामी,
बहुमूल्य है,
यह है जहाँ,
होता वही पर स्वर्ग है |
जितनी परिभाषाये प्रेम की है उतनी दुनिया में किसी भी दूसरे मनोभाव की नहीं है....
ये वह एहसास है जिसे मानव ही नहीं पशु-पछी,पेड़-पौधे भी समझते है
प्रेम अभिव्यक्ति है --आनंद की,मधुरता की,सौंदर्य की,,
प्रेम वियोग है,त्याग है,समर्पण है .....
प्रेम कभी आंसुओ में छिपी मुस्कान जैसा है तो कभी मुस्कान में छिपे आंसुओ जैसा है..
प्रेम,
बहुआयामी,
बहुमूल्य है,
यह है जहाँ,
होता वही पर स्वर्ग है |
प्रेम... बाइबिल अनुसार

‘‘जिसका यह विश्वास है कि यीशु ही मसीह है, वह परमेश्वर से उत्पन्न हुआ है और जो कोई उत्पन्न करने वाले से प्रेम रखता है, वह उससे भी प्रेम रखता है जो उससे उत्पन्न हुआ है’’ (1यूहन्ना 5:1)
बाइबिल का सार एक शब्द में ‘‘प्रेम’’ है। यह हम सभी जानते हैं, परमेश्वर से हम प्रेम रखते हैं। उसकी अभिव्यक्ति है कि हम परमेश्वर की आज्ञाओं को मानते हुए आपस में एक दूसरे से प्रेम रखें। जब तक प्रेम नहीं होता, रचना नहीं होती, उत्पत्ति नहीं होती। कृति का कविता से प्रेम, कलाकार का कला से प्रेम, स्त्री-पुरूष का आपसी प्रेम, जिससे सुन्दर आदर्श परिवार का निर्माण हो। व्यक्ति का स्वयं के द्वारा चुने गये कार्य के प्रति, प्रेम व समर्पण आस्था जो उसे अपना सर्वोत्तम कर दिखाने को प्रेरित करती हैं।
यह प्रेम न हो तो मनुष्य विध्वसंक हो जाता है। यही कारण है कि आज हम देश में कई एकता- समारोह करते हैं और फिर भी दंगे आतंकवाद और भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है; क्योंकि लोग मसीह से, अपने उद्धारकर्ता से दूर है। यदि वे मसीह को जानते और इसे पहचानते तो उसने जो हमारे लिये सहायक के रूप में पवित्र आत्मा को रख छोड़ा है, वह हमारी सहायता करता कि हम अनंत संबंध के संदर्भ में अपने भाईयों को पहचानते और उनके सामने अपने विश्वास की अभिव्यक्ति के रूप में वह प्रेम बांटते जिससे उनके दिल खोले जायें, छुए जांए और हम आपस में एकता के पवित्र बन्धन में बांधे जाये।
यह प्रेम न हो तो मनुष्य विध्वसंक हो जाता है। यही कारण है कि आज हम देश में कई एकता- समारोह करते हैं और फिर भी दंगे आतंकवाद और भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है; क्योंकि लोग मसीह से, अपने उद्धारकर्ता से दूर है। यदि वे मसीह को जानते और इसे पहचानते तो उसने जो हमारे लिये सहायक के रूप में पवित्र आत्मा को रख छोड़ा है, वह हमारी सहायता करता कि हम अनंत संबंध के संदर्भ में अपने भाईयों को पहचानते और उनके सामने अपने विश्वास की अभिव्यक्ति के रूप में वह प्रेम बांटते जिससे उनके दिल खोले जायें, छुए जांए और हम आपस में एकता के पवित्र बन्धन में बांधे जाये।
एक दूसरे को गिरा कर नहीं पर उठाकर साथ चलें। प्रेम अनंत है, स्थायी है जो बांटने से बढ़ता है, जो संक्रामक है। आप प्रेम बांटेगे तो आप प्रेम पायेंगे, और यही प्रेम एक बेहतर संसार निर्माण करेगा जिसकी योजना परमेश्वर ने बनायी जब उन्होने आदम हव्वा को रचा; सृष्टि के बिगड़ते स्वरूप को देखकर उन्होंने जलप्रलय और आग-गन्धक से इसका नाश किया। फिर दुखी हुए क्योंकि उनका प्रेम महान् है उन्होंने इस समस्या के निवारण के लिए अपने पुत्र का बलिदान इस संसार के लिए दे दिया। हम आज उस पर, उसके प्रेम पर कितना विश्वास करते हैं और हमारी क्या प्रतिक्रिया है?
प्रार्थना :-
प्रार्थना :-
हे पिता, हम जो इस बात को अपनी धरोहर समझ घमण्ड करते हैं कि हम तुझसे उत्पन्न हुए। वर दे कि हम उसके अनुसार आचरण कर, इस संसार को वैसा बनाने का प्रयास करें जैसा आप चाहते है। आमीन।
डॉ. श्रीमती शीला लाल
प्रेम के बदले प्रेम.....
एक बच्चा रोज अपने घर के पास के एक पेड़ के नीचे खेलने आता था। कभी वह पेड़ के चारों ओर घूमता, कभी नाचता। धीरे-धीरे उस पेड़ को बच्चे से प्रेम हो गया। अब पेड़ भी अपनी शाखाओं को नीचे कर देता ताकि उसकी नर्म पत्तियां उसके लाड़ले को सहला सकें और बच्चा उसकी शाखाओं पर लटक कर खेल सके।
बच्चा बड़ा होने लगा। वह कभी फूल तोड़ता, तो कभी फल खाता। कभी उसके फूलों का ताज पहन कर खुश होता। समय निरंतर बहता रहा। बच्चे का आना धीरे-धीरे कम होने लगा। फिर भी, जब कभी वह आता और उसकी शाखाओं पर चढ़ कर जोर-जोर से झूलता तो वृक्ष को बहुत खुशी होती।
फिर वह कभी आता, कभी नहीं आता। प्रेम एक प्रतीक्षा है। पेड़ की शाखाएं मन ही मन पुकारतीं, ओ मेरे बच्चे, मेरे पास आओ। पर लड़के की दुनिया फैल रही थी। वह पेड़ की परिधि से बाहर निकल रहा था। लंबे समय के बाद एक बार वह उस वृक्ष के पास आया। उस पेड़ की शाखाएं बोलीं, आओ हम तुम्हें याद करते हैं।
लड़का बोला, समय बदल गया है। अब मुझे पैसों की जरूरत होती है। उसके लिए मुझे कई जगहों पर जाना पड़ता है। तुम्हारे पास मैं कैसे और कब आऊं, तुम मुझे क्या पैसे दे सकते हो? पेड़ असमंजस में पड़ गया कि मैं तुम्हें पैसा कैसे दे सकता हूं। पैसा तो मनुष्य के पास होता है, पर मैं मनुष्य नहीं हूं। मेरे पास तो ऐसा कुछ भी नहीं है। हां, तुम मेरे फल तोड़ लो, उसे बेच कर तुम पैसा पा सकते हो।
लड़के ने वैसा ही किया। उसने बहुत सारे कच्चे- पक्के फल तोड़ लिए। इस कोशिश में पेड़ की कुछ शाखाएं भी टूट गईं। किंतु पेड़ खुश था कि वह जिसको प्रेम करता है उसके काम आया।
छोटा बच्चा जो अब बड़ा हो चुका था, वह फल बेचकर पैसा कमाने लगा। इस कोशिश में वह फिर उस पेड़ को भूल गया। और पेड़ फिर बेचैन होने लगा। उसकी शाखाएं फिर हवाओं को संदेश देने लगीं। इस बीच वह लड़का एक प्रौढ़ आदमी बन गया।
एक दिन घूमता हुआ वह पेड़ के पास से गुजरा, तो पेड़ ने उसे पुकारा, तुम तो मुझे भूल ही गए। मैं तुम्हें कितना याद करता हूं। उसने कहा, कैसे आऊं तुम्हारे पास, मुझे घर बनाना है। पेड़ बोला, हां, मनुष्य तो घर में ही रहते हैं। मैं खुली हवाओं में रहता हूं, इसलिए मुझे उसके महत्व का अंदाजा नहीं होता। किंतु तुम्हें तो चाहिए ही। तुम ऐसा करो कि मेरी शाखाएं काट लो। इससे शायद तुम्हारा घर बन जाए।
उसने आरी से पेड़ काट डाला। पेड़ एक ठूंठ बन कर रह गया , किंतु वह खुश था कि जिसको वह प्रेमकरता है उसके काम आया। वह लकड़ी लेकर गया और एक आलीशान घर बनाया।
लेकिन कुछ दिनों बाद वह आदमी फिर उस ठूंठ बने पेड़ के पास लौटा। कहने लगा , मैं ने तुम्हारासब कुछ ले लिया , फिर भी तुम सोच रहे हो कि आज मुझे कुछ नहीं दे पाओगे। पर आज मैं कुछलेने नहीं आया क्षमा मांगने आया हूं तुम से। पेड़ ने कहा , प्रेम के बदले प्रेम दे सकते हो तो दो ,मेरे पास क्षमा नहीं है। वह उस ठूंठ से चिपक गया और रोने लगा क्योंकि अब वह खुद बूढ़ा हो रहाथा और बच्चों की नजर में ठूंठ हो गया था।
आज उसने उस ठूंठ के पास नन्हा पौधा लगाया और बोला , यह नन्हा पौधा
तुम्हारा अस्तित्व बनेगा ..
किंतु तुम इसे किसी से प्रेम करना मत सिखाना। वृक्ष बोला , पर यही तो हमारी प्रकृति है। हमें तो प्रेम देना ही है , चाहे हमारा अस्तित्व समाप्त ही क्यूं न हो जाए।
बच्चा बड़ा होने लगा। वह कभी फूल तोड़ता, तो कभी फल खाता। कभी उसके फूलों का ताज पहन कर खुश होता। समय निरंतर बहता रहा। बच्चे का आना धीरे-धीरे कम होने लगा। फिर भी, जब कभी वह आता और उसकी शाखाओं पर चढ़ कर जोर-जोर से झूलता तो वृक्ष को बहुत खुशी होती।
फिर वह कभी आता, कभी नहीं आता। प्रेम एक प्रतीक्षा है। पेड़ की शाखाएं मन ही मन पुकारतीं, ओ मेरे बच्चे, मेरे पास आओ। पर लड़के की दुनिया फैल रही थी। वह पेड़ की परिधि से बाहर निकल रहा था। लंबे समय के बाद एक बार वह उस वृक्ष के पास आया। उस पेड़ की शाखाएं बोलीं, आओ हम तुम्हें याद करते हैं।
लड़का बोला, समय बदल गया है। अब मुझे पैसों की जरूरत होती है। उसके लिए मुझे कई जगहों पर जाना पड़ता है। तुम्हारे पास मैं कैसे और कब आऊं, तुम मुझे क्या पैसे दे सकते हो? पेड़ असमंजस में पड़ गया कि मैं तुम्हें पैसा कैसे दे सकता हूं। पैसा तो मनुष्य के पास होता है, पर मैं मनुष्य नहीं हूं। मेरे पास तो ऐसा कुछ भी नहीं है। हां, तुम मेरे फल तोड़ लो, उसे बेच कर तुम पैसा पा सकते हो।
लड़के ने वैसा ही किया। उसने बहुत सारे कच्चे- पक्के फल तोड़ लिए। इस कोशिश में पेड़ की कुछ शाखाएं भी टूट गईं। किंतु पेड़ खुश था कि वह जिसको प्रेम करता है उसके काम आया।
छोटा बच्चा जो अब बड़ा हो चुका था, वह फल बेचकर पैसा कमाने लगा। इस कोशिश में वह फिर उस पेड़ को भूल गया। और पेड़ फिर बेचैन होने लगा। उसकी शाखाएं फिर हवाओं को संदेश देने लगीं। इस बीच वह लड़का एक प्रौढ़ आदमी बन गया।
एक दिन घूमता हुआ वह पेड़ के पास से गुजरा, तो पेड़ ने उसे पुकारा, तुम तो मुझे भूल ही गए। मैं तुम्हें कितना याद करता हूं। उसने कहा, कैसे आऊं तुम्हारे पास, मुझे घर बनाना है। पेड़ बोला, हां, मनुष्य तो घर में ही रहते हैं। मैं खुली हवाओं में रहता हूं, इसलिए मुझे उसके महत्व का अंदाजा नहीं होता। किंतु तुम्हें तो चाहिए ही। तुम ऐसा करो कि मेरी शाखाएं काट लो। इससे शायद तुम्हारा घर बन जाए।
उसने आरी से पेड़ काट डाला। पेड़ एक ठूंठ बन कर रह गया , किंतु वह खुश था कि जिसको वह प्रेमकरता है उसके काम आया। वह लकड़ी लेकर गया और एक आलीशान घर बनाया।
लेकिन कुछ दिनों बाद वह आदमी फिर उस ठूंठ बने पेड़ के पास लौटा। कहने लगा , मैं ने तुम्हारासब कुछ ले लिया , फिर भी तुम सोच रहे हो कि आज मुझे कुछ नहीं दे पाओगे। पर आज मैं कुछलेने नहीं आया क्षमा मांगने आया हूं तुम से। पेड़ ने कहा , प्रेम के बदले प्रेम दे सकते हो तो दो ,मेरे पास क्षमा नहीं है। वह उस ठूंठ से चिपक गया और रोने लगा क्योंकि अब वह खुद बूढ़ा हो रहाथा और बच्चों की नजर में ठूंठ हो गया था।
आज उसने उस ठूंठ के पास नन्हा पौधा लगाया और बोला , यह नन्हा पौधा
तुम्हारा अस्तित्व बनेगा ..
किंतु तुम इसे किसी से प्रेम करना मत सिखाना। वृक्ष बोला , पर यही तो हमारी प्रकृति है। हमें तो प्रेम देना ही है , चाहे हमारा अस्तित्व समाप्त ही क्यूं न हो जाए।
Saturday, April 30, 2011
प्रेम..एक भावना
प्रेम एक शब्द नहीं, बल्कि एक भावना है, अहसास है। यह जब दिल में
उपजता है, तो सुख-दुख, लाभ-हानि, मान-अपमान, अपना-पराया का भेद मिटा देता है। प्रेम सबके लिए हर समय एक जैसा रहना चाहिए। प्रेम में लेने का नहीं, बल्कि सिर्फ देने का भाव होता है।
एक प्रेम ही ऐसा है जिससे दुश्मन भी अपने हो जाते हैं। बिना प्रेम का जीवन तो नीरस है। प्रेम है तो खुशी है और जब खुशी होती है तो चेहरे पर मुस्कराहट बनी रहती है। जब मन प्रेम से भरता है तो दिनभर के सभी कामों में प्रेम झलकने लगता है। फिर चलना-फिरना, खाना-पीना, देखना, बोलना सब प्रेममय हो जाता है।
प्रेम है तो हम जीवन जीते हैं, नहीं तो काटते हैं। आसपास के सभी लोगों का अच्छी तरह ध्यान रखना और सबके लिए अच्छी भावना रखना ही प्रेम है। आज घर-घर में कलह की वजह आपस में प्यार न होना ही तो है। अहंकार की वजह से किसी की जरा-सी बात भी बर्दाश्त नहीं कर पाते क्योंकि जब अहंकार जागता है, तो भीतर का प्रेम दूर भाग जाता है।
आपस में मतभेद होना बुरा नहीं लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए क्योंकि मनभेद ही घर को नरक बना देता है। प्रेम से ही घर को स्वर्ग बनाया जा सकता है। अगर मन में प्रेम है तो वह कभी ठहरेगा नहीं, क्योंकि प्रेम हमेशा बहता रहता है और बहकर अपनी जगह खुद बना लेता है।
अगर हम ध्यान दें तो एक शख्स का जीवन में गिने-चुने लोगों से ही द्वेष होता है। अगर पूरी मेहनत करके वहां प्रेम पैदा कर दिया जाए, जीवन खुशियों से भर सकता है।
By. Yogacharya Surakshit Goswami
उपजता है, तो सुख-दुख, लाभ-हानि, मान-अपमान, अपना-पराया का भेद मिटा देता है। प्रेम सबके लिए हर समय एक जैसा रहना चाहिए। प्रेम में लेने का नहीं, बल्कि सिर्फ देने का भाव होता है।
एक प्रेम ही ऐसा है जिससे दुश्मन भी अपने हो जाते हैं। बिना प्रेम का जीवन तो नीरस है। प्रेम है तो खुशी है और जब खुशी होती है तो चेहरे पर मुस्कराहट बनी रहती है। जब मन प्रेम से भरता है तो दिनभर के सभी कामों में प्रेम झलकने लगता है। फिर चलना-फिरना, खाना-पीना, देखना, बोलना सब प्रेममय हो जाता है।
प्रेम है तो हम जीवन जीते हैं, नहीं तो काटते हैं। आसपास के सभी लोगों का अच्छी तरह ध्यान रखना और सबके लिए अच्छी भावना रखना ही प्रेम है। आज घर-घर में कलह की वजह आपस में प्यार न होना ही तो है। अहंकार की वजह से किसी की जरा-सी बात भी बर्दाश्त नहीं कर पाते क्योंकि जब अहंकार जागता है, तो भीतर का प्रेम दूर भाग जाता है।
आपस में मतभेद होना बुरा नहीं लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए क्योंकि मनभेद ही घर को नरक बना देता है। प्रेम से ही घर को स्वर्ग बनाया जा सकता है। अगर मन में प्रेम है तो वह कभी ठहरेगा नहीं, क्योंकि प्रेम हमेशा बहता रहता है और बहकर अपनी जगह खुद बना लेता है।
अगर हम ध्यान दें तो एक शख्स का जीवन में गिने-चुने लोगों से ही द्वेष होता है। अगर पूरी मेहनत करके वहां प्रेम पैदा कर दिया जाए, जीवन खुशियों से भर सकता है।
By. Yogacharya Surakshit Goswami
Thursday, April 28, 2011
क्यों रोने का मन किया...
आज न जाने क्यों रोने का मन किया ..
माँ के आंचल में सर छुपा कर सोने का मन किया..
दुनिया की भाग दौड़ में खो चुके थे रिश्ते सब..
किसी दिन भीड़ में देखी थी किसी की आँखें ..
आज फिर उन आँखों में खोने का मन किया ..
रोज सपनों से बातें करता था मैं ..
आज उन सपनों से मुह मोड़ने को मन क्या..
झूठ बोलता हूँ अपने आप से रोज़ मै..
आज न जाने क्यों अपने आप से सच बोलने का मन किया..
दिल तोड़ता हूँ अपनी बातों से सबका मैं..
आज न जाने क्यों किसी का दिल जोड़ने का मन किया..
आज न जाने क्यों रोने का मन किया!!!
Wednesday, April 27, 2011
मेरी माँ...
गंगा किनारे एक ढपली वाला रोज ढपली बजाया करता था. वो जैसे ही ढपली बजाना शुरू करता एक हिरन का बच्चा वहां आ जाया करता था....
ये क्रम रोज चला...
एक दिन उस ढपली वाले ने उस हिरन के बच्चे से पूछा की तुम रोज यहाँ आकर मेरी ढपली सुनते हो क्या मैं इतना अच्छा बजाता हूँ...
बच्चे ने मना कर दिया..
उसने पूछा तुम मुझसे सीखना चाहते हो ढपली बजाना ? बच्चे ने फिर मना कर दिया..
तो उत्सुकता वश ढपली वादक ने पूछा तुम फिर रोज-रोज क्यों आ जाते हो..?
उस हिरन के बच्चे ने उत्तर दिया की जो ढपली तुम बजा रहे हो उसमे जो खाल लगी हैं वो मेरी माँ की हैं.
तुम जब भी इसे बजाते हो मुझे मेरी माँ की याद आ जाती हैं.
मैं इसलिए चला आता हूँ...
Sunday, April 24, 2011
Saturday, April 23, 2011
प्रेम..
जिसे तुम प्रेम कहते हो--यह बांटना नहीं है, यह झपटना है।
तुम्हें प्रेम का अर्थ बदलना होगा। यह ऐसी बात नहीं है कि तुम किसी दूसरे से इसे लेने की कोशिश कर रहे हो। और यह प्रेम का सारा इतिहास रहा है; सभी दूसरे से, जितना हो सके उतना, इसे लेने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों ही लेने की कोशिश कर रहे हैं, और स्वाभाविक ही, किसी को भी कुछ भी नहीं मिल रहा है।
प्रेम कोई ऐसी बात नहीं है कि जिसे लिया जा सके। प्रेम तो देने की बात है। लेकिन तुम तब ही दे सकते हो जब तुम्हारे पास यह हो। क्या तुम्हारे भीतर प्रेम है? क्या तुमने कभी यह प्रश्न पूछा है? मौन बैठ कर, तुमने कभी देखा है? तुम्हारे पास कोई प्रेम की ऊर्जा है देने के लिए?
तुम्हारे पास नहीं है, न ही किसी दूसरे पास है। तब तुम प्रेम संबंध में फंस जाते हो। दोनो ही दिखावा कर रहे हैं, दिखावा कर रहे हैं कि वे तुम्हें स्वर्ग देंगे। दोनों ही एक-दूसरे को भरोसा दिला रहे हैं कि "एक बार तुम मेरे साथ शादी कर लोगे, हमारी रातें हजारों अरेबीयन रातों को भुला देंगी, हमारे दिन स्वर्णिम होंगे।'
लेकिन तुम नहीं जानते कि तुम्हारे पास देने को कुछ भी नहीं है। ये सारी बातें जो तुम कह रहे हो वह लेने के लिए हैं। और दूसरा भी यही बात कर रहा है। एक बार तुम शादी कर लेते हो, तब वहां निश्चित ही परेशानी होने वाली है ; दोनों ही हजारों अरेबिनयन रातों का इंतजार कर रहे हैं और एक भारतीय रात भी नहीं घट रही है! तब गुस्सा है, रोष है जो धीरे-धीरे जहरीला बन जाता है।
प्रेम का नफरत में बदल जाना बहुत सरल सी घटना है, क्योंकि सभी महसूस करते हैं कि उनके साथ धोखा हुआ है। तुम समुद्र किनारे, सिनेमा हॉल में, नृत्य स्थल पर एक चेहरा बताते हो। आधे या एक घंटे के लिए समुद्र किनारे बैठे हुए एक-दूसरे का हाथ हाथ में लिए आने वाले सुंदर जीवन के सपने देखना एक बात है। लेकिन एक बार जब तुम शादी कर लेते हो, वह सब तुम अपेक्षा कर रहे थे, सपने देख रहे थे, वाष्पीभूत होने लगेंगे।
मेरा तुम्हें यह सुझाव है कि : ध्यान करो। अधिक से अधिक शांत होओ, मौन होओ, स्थिर होओ। अपने भीतर शांति को पैदा होने दो। वह हजारों तरह से तुम्हें मदद करेगा...सिर्फ प्रेम में ही नहीं, यह तुम्हें अधिक सुंदर मूर्ति बनाने में भी मदद करेगा। क्योंकि जो व्यक्ति मनुष्य को प्रेम नहीं कर सकता; वह कैसे सृजन कर सकता है? वह क्या सृजन करेगा ? प्रेमविहिन हृदय वास्तविक सृजनशील नहीं हो सकता। वह ध्यान कर सकता है, लेकिन वह सृजन नहीं कर सकता।
सारा सृजन प्रेम, समझ और मौन है।
Osho...
तुम्हें प्रेम का अर्थ बदलना होगा। यह ऐसी बात नहीं है कि तुम किसी दूसरे से इसे लेने की कोशिश कर रहे हो। और यह प्रेम का सारा इतिहास रहा है; सभी दूसरे से, जितना हो सके उतना, इसे लेने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों ही लेने की कोशिश कर रहे हैं, और स्वाभाविक ही, किसी को भी कुछ भी नहीं मिल रहा है।
प्रेम कोई ऐसी बात नहीं है कि जिसे लिया जा सके। प्रेम तो देने की बात है। लेकिन तुम तब ही दे सकते हो जब तुम्हारे पास यह हो। क्या तुम्हारे भीतर प्रेम है? क्या तुमने कभी यह प्रश्न पूछा है? मौन बैठ कर, तुमने कभी देखा है? तुम्हारे पास कोई प्रेम की ऊर्जा है देने के लिए?
तुम्हारे पास नहीं है, न ही किसी दूसरे पास है। तब तुम प्रेम संबंध में फंस जाते हो। दोनो ही दिखावा कर रहे हैं, दिखावा कर रहे हैं कि वे तुम्हें स्वर्ग देंगे। दोनों ही एक-दूसरे को भरोसा दिला रहे हैं कि "एक बार तुम मेरे साथ शादी कर लोगे, हमारी रातें हजारों अरेबीयन रातों को भुला देंगी, हमारे दिन स्वर्णिम होंगे।'
लेकिन तुम नहीं जानते कि तुम्हारे पास देने को कुछ भी नहीं है। ये सारी बातें जो तुम कह रहे हो वह लेने के लिए हैं। और दूसरा भी यही बात कर रहा है। एक बार तुम शादी कर लेते हो, तब वहां निश्चित ही परेशानी होने वाली है ; दोनों ही हजारों अरेबिनयन रातों का इंतजार कर रहे हैं और एक भारतीय रात भी नहीं घट रही है! तब गुस्सा है, रोष है जो धीरे-धीरे जहरीला बन जाता है।
प्रेम का नफरत में बदल जाना बहुत सरल सी घटना है, क्योंकि सभी महसूस करते हैं कि उनके साथ धोखा हुआ है। तुम समुद्र किनारे, सिनेमा हॉल में, नृत्य स्थल पर एक चेहरा बताते हो। आधे या एक घंटे के लिए समुद्र किनारे बैठे हुए एक-दूसरे का हाथ हाथ में लिए आने वाले सुंदर जीवन के सपने देखना एक बात है। लेकिन एक बार जब तुम शादी कर लेते हो, वह सब तुम अपेक्षा कर रहे थे, सपने देख रहे थे, वाष्पीभूत होने लगेंगे।
मेरा तुम्हें यह सुझाव है कि : ध्यान करो। अधिक से अधिक शांत होओ, मौन होओ, स्थिर होओ। अपने भीतर शांति को पैदा होने दो। वह हजारों तरह से तुम्हें मदद करेगा...सिर्फ प्रेम में ही नहीं, यह तुम्हें अधिक सुंदर मूर्ति बनाने में भी मदद करेगा। क्योंकि जो व्यक्ति मनुष्य को प्रेम नहीं कर सकता; वह कैसे सृजन कर सकता है? वह क्या सृजन करेगा ? प्रेमविहिन हृदय वास्तविक सृजनशील नहीं हो सकता। वह ध्यान कर सकता है, लेकिन वह सृजन नहीं कर सकता।
सारा सृजन प्रेम, समझ और मौन है।
Osho...
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